Skip to main content

गीत विजय के गाये जा


गीत विजय के गाये जा ।

अपना धरम निभाये जा ।।

गीत विजय के गाये जा ।

अपना धरम निभाये जा ।।


अपना धरम है संयम पथ पर,

रखना तन को, मन को शुद्ध ।

कोई भी व्यवहार आचरण, 

कभी ना होगा नीति विरुद्ध ।।

जीवन पुष्प चढ़ाये जा

अपना धरम निभाये जा ||


अपना धरम है तजें विषमता,

समरस अमृत घोलेंगे ।

सारे भेद तिरोहित करके,

हृदय हृदय को जोड़ेंगे ।।

नव चैतन्य जगाए जा

अपना धरम निभाये जा | |


अपना धरम है निर्भय होकर,

अनथक तप दिनरात करें ।

सर्व सुमंगल जीवन व्रत का,

हर पल हर क्षण ध्यान करें ।।

मुक्त गगन लहराए जा

अपना धरम निभाये जा | |


गीत विजय के गाये जा ।

अपना धरम निभाये जा ।। 




और भी पढ़ना चाहिए ...